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المائدة

आयत 14

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَمِنَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّا نَصَـٰرَىٰٓ أَخَذْنَا مِيثَـٰقَهُمْ فَنَسُوا۟ حَظًّا مِّمَّا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ فَأَغْرَيْنَا بَيْنَهُمُ ٱلْعَدَاوَةَ وَٱلْبَغْضَآءَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ وَسَوْفَ يُنَبِّئُهُمُ ٱللَّهُ بِمَا كَانُوا۟ يَصْنَعُونَ ﴿١٤﴾

जिस तरह हमने यहूदियों से दृढ़ वचन लिया था, उसी तरह हमने उन लोगों से भी वचन लिया, जिन्होंने अपनी पवित्रता जताते हुए कहा कि वे ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वाले हैं। फिर उन्होंने उसमें से एक भाग पर अमल करना छोड़ दिया, जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था, जैसा कि यहूदियों में से उनके पूर्वजों ने किया था। तथा हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक के लिए शत्रुता तथा सख़्त घृणा डाल दी। अतः वे आपस में लड़ने वाले बन गए, वे एक-दूसरे को काफ़िर कहने लगे। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें बताएगा जो कुछ वे किया करते थे और उन्हें उसका बदला देगा।