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الفجر
आयत 24
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى قَدَّمْتُ لِحَيَاتِى ﴿٢٤﴾
वह बड़े अफ़सोस के साथ कहेगा : ऐ काश! मैंने अपने इस आख़िरत के जीवन के लिए नेक कार्य किए होते, जो वास्तविक जीवन है।
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