तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِۦ رَيْبَ ٱلْمَنُونِ ﴿٣٠﴾
या क्या ये झुठलाने वाले कहते हैं : मुहम्मद एक रसूल नहीं हैं, बल्कि वह एक शा'इर हैं, जिनके बारे में हम इस बात की प्रतीक्षा करते हैं कि मौत उन्हें उचक ले और हम उनसे आराम पा जाएँ।