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الطور

आयत 29

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَذَكِّرْ فَمَآ أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ ﴿٢٩﴾

तो (ऐ रसूल!) आप क़ुरआन के द्वारा नसीहत करें। क्योंकि अल्लाह ने आपको जो ईमान और विवेक दिया है, उसके कारण आप न किसी तरह काहिन हैं कि आपके पास कोई मुवक्किल जिन्न है और न ही आप कोई दीवाना हैं।