तफ़सीर अल-मुख़्तसर
مَا قُلْتُ لَهُمْ إِلَّا مَآ أَمَرْتَنِى بِهِۦٓ أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبَّكُمْ ۚ وَكُنتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا مَّا دُمْتُ فِيهِمْ ۖ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَنِى كُنتَ أَنتَ ٱلرَّقِيبَ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ شَهِيدٌ ﴿١١٧﴾
ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से कहा : मैंने उनसे केवल वही कहा, जो कुछ तूने मुझे कहने का आदेश दिया था कि उन्हें एकमात्र तेरी इबादत करने का आदेश दूँ। और जब तक मैं उनके बीच मौजूद था तो वे जो कुछ कहते थे मैं उसकी निगरानी करता था। फिर जब तूने मुझे जीवित आकाश पर उठाकर उनके बीच मेरे रहने की अवधि का समापन कर दिया, तो - ऐ मेरे रब! - तू ही उनके कर्मों का संरक्षक था, और तू हर चीज़ का साक्षी है, कोई भी चीज़ तुझसे छिपी नहीं। अतः जो कुछ मैंने उनसे कहा और जो कुछ उन्होंने मेरे बाद कहा, वह तुझसे छिपा नहीं।