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فصلت

आयत 6

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰٓ إِلَىَّ أَنَّمَآ إِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌ وَٰحِدٌ فَٱسْتَقِيمُوٓا۟ إِلَيْهِ وَٱسْتَغْفِرُوهُ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْمُشْرِكِينَ ﴿٦﴾

(ऐ रसूल) इन अवज्ञाकारियों से कह दें कि मैं तुम्हारे ही जैसा एक इनसान हूँ। अल्लाह मेरी आेर वह्य भेजता है कि तुम्हारा सत्य पूज्य बस एक ही सत्य पूज्य है। वह अल्लाह है। अत-, उसी की ओर ले जाने वाली राह पर चलो। उसी से गुनाहों की क्षमा माँगो। बेशक विनाश व यातना उन मुश्रिकों के लिए है, जो अल्लाह के सिवा किसी और की वंदना करते हैं अथवा उसका किसी दूसरे को साझी बनाते हैं।