तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالُوا۟ قُلُوبُنَا فِىٓ أَكِنَّةٍ مِّمَّا تَدْعُونَآ إِلَيْهِ وَفِىٓ ءَاذَانِنَا وَقْرٌ وَمِنۢ بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌ فَٱعْمَلْ إِنَّنَا عَـٰمِلُونَ ﴿٥﴾
तथा उन्होंने कहा कि हमारे दिलों परदों में ढके हैं, अतः वे उसे समझ नहीं पाते जिसकी ओर आप हमें बुला रहे हैं। और हमारें कानों में बोझ है, अतः वह आपकी बात सुन नहीं पाते। और हमारे तथा आपके बीच ऐक परदा है, जिसके कारण आपकी कोई भी बात हम तक नहीं पहुँच नहीं पाती। तो आप अपना रास्ता चलते रहें, हम अपने रास्ते पर चलते हैं। कदापि हम आपका अनुसरण नहीं करेंगे।