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الشعراء

आयत 49

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قَالَ ءَامَنتُمْ لَهُۥ قَبْلَ أَنْ ءَاذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُۥ لَكَبِيرُكُمُ ٱلَّذِى عَلَّمَكُمُ ٱلسِّحْرَ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَـٰفٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٤٩﴾

फ़िरऔन ने जादूगरों के ईमान को अस्वीकार करते हुए कहा : क्या तुम मूसा पर ईमान ले आए, इससे पहले कि मैं तुम्हें ऐसा करने की अनुमति देता? निःसंदेह मूसा अवश्य तुम्हारा प्रमुख है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है, तथा तुम सब ने मिलकर मिस्र के वासियों को उनकी भूमि से निकालने की साज़िश रची है। अतः शीघ्र ही तुम जान लोगे कि मैं तुम्हें क्या दण्ड देता हूँ। मैं अवश्य ही हर एक का पैर और उसका हाथ विपरीत दिशा से काट दूँगा, यानी दाहिने पैर को बाएँ हाथ के साथ या उसके विपरीत बाएँ पैर को दाहिने हाथ के साथ। तथा तुम सभी को खजूर के तनों पर सूली पर चढ़ा दूँगा, तुममें से किसी को भी जीवित नहीं छोड़ूँगा।