तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَٱتَّقُوا۟ يَوْمًا لَّا تَجْزِى نَفْسٌ عَن نَّفْسٍ شَيْـًٔا وَلَا يُقْبَلُ مِنْهَا عَدْلٌ وَلَا تَنفَعُهَا شَفَـٰعَةٌ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ ﴿١٢٣﴾
अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर अपने और क़ियामत के दिन की यातना के बीच, बचाव का साधन अपनाओ। क्योंकि उस दिन कोई भी किसी के कुछ काम न आएगा, और उस दिन उससे कोई छुड़ौती स्वीकार नहीं की जाएगी, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो, और न उस दिन उसे किसी की सिफ़ारिश लाभ देगी, चाहे उसका स्थान कितना भी ऊँचा क्यों न हो। और न ही अल्लाह के अलावा उसके लिए कोई मददगार होगा, जो उसकी मदद कर सके।