तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هَلْ تُحِسُّ مِنْهُم مِّنْ أَحَدٍ أَوْ تَسْمَعُ لَهُمْ رِكْزًۢا ﴿٩٨﴾
आपकी जाति के लोगों से पहले हम बहुत-से समुदायों को विनष्ट कर चुके हैं। तो क्या आप आज उन समुदायों में से किसी एक को महसूस करते हैं?! और क्या आप उनकी कोई भनक सुनते हैं?! अतः जो उनके साथ हुआ, वह दूसरों के साथ (भी) हो सकता है। बस अल्लाह की अनुमति की देर है।