×

الكهف

आयत 35

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَدَخَلَ جَنَّتَهُۥ وَهُوَ ظَالِمٌ لِّنَفْسِهِۦ قَالَ مَآ أَظُنُّ أَن تَبِيدَ هَـٰذِهِۦٓ أَبَدًا ﴿٣٥﴾

और उस काफ़िर ने ईमान वाले के साथ अपने बाग़ में प्रवेश किया, ताकि उसे अपना बाग़ दिखाए, जबकि वह कुफ़्र और गर्व के द्वारा अपने आप पर अत्याचार करने वाला था। काफ़िर ने कहा : मुझे नहीं लगता कि यह बाग़ जो तुम देख रहे हो, नष्ट हो जाएगा। क्योंकि मैंने उसके बाकी रहने के कारण अपना लिए हैं।