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الكهف

आयत 15

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

هَـٰٓؤُلَآءِ قَوْمُنَا ٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةً ۖ لَّوْلَا يَأْتُونَ عَلَيْهِم بِسُلْطَـٰنٍۭ بَيِّنٍ ۖ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا ﴿١٥﴾

फिर वे एक-दूसरे की ओर यह कहते हुए मुड़े : ये हमारी जाति के लोग हैं। इन्होंने अल्लाह के अलावा दूसरे पूज्य बना रखे हैं, जिनकी ये पूजा करते हैं। हालाँकि इनके पास उनकी पूजा का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। अतः उससे बड़ा अत्याचारी कोई नहीं हो सकता, जो अल्लाह की ओर साझी की निस्बत करके उसपर झूठ गढ़े।