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الكهف

आयत 14

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَرَبَطْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ إِذْ قَامُوا۟ فَقَالُوا۟ رَبُّنَا رَبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ لَن نَّدْعُوَا۟ مِن دُونِهِۦٓ إِلَـٰهًا ۖ لَّقَدْ قُلْنَآ إِذًا شَطَطًا ﴿١٤﴾

और हमने उनके दिलों को ईमान और उसपर दृढ़ता, तथा उसके लिए स्वदेश छोड़ने पर धैर्य के साथ मज़बूत कर दिया, जब उन्होंने काफ़िर राजा के सामने खड़े होकर एक अल्लाह पर अपने ईमान लाने की घोषणा की और उससे कहा : जिस पालनहार पर हम ईमान लाए और उसकी पूजा की, वह आकाशों और धरती का पालनहार है। हम उसके सिवा तथाकथित झूठे पूज्यों की हरगिज़ पूजा नहीं करेंगे। यदि हमने उसके सिवा किसी अन्य की पूजा की, तो हमने सत्य से दूर एक अनुचित बात कही।