तफ़सीर अल-मुख़्तसर
إِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌ وَٰحِدٌ ۚ فَٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْـَٔاخِرَةِ قُلُوبُهُم مُّنكِرَةٌ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ ﴿٢٢﴾
तुम्हारा सत्य पूज्य केवल एक है, जिसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है। वे लोग जो बदले के लिए दोबारा जीवितकर उठाए जाने पर ईमान नहीं रखते, उनके दिल अल्लाह के भय से खाली होने के कारण अल्लाह के एकत्व का इनकार करते हैं। अतः वे हिसाब या दंड पर ईमान नहीं रखते हैं। तथा वे अभिमानी हैं, जो सत्य को स्वीकार नहीं करते हैं और न ही उसके आगे झुकते हैं।