तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَمْوَٰتٌ غَيْرُ أَحْيَآءٍ ۖ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ ﴿٢١﴾
यद्यपि उनके उपासकों ने उन्हें अपने हाथों से बनाया है, वे निर्जीव भी हैं, जिनमें कोई जीवन या ज्ञान नहीं है। चुनाँचे वे नहीं जानते कि वे अपने उपासकों के साथ क़ियामत के दिन कब पुनः जीवित किए जाएँगे, ताकि उन के साथ जहन्नम की आग में फेंके जाएँ।