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النحل

आयत 124

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنَّمَا جُعِلَ ٱلسَّبْتُ عَلَى ٱلَّذِينَ ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ ۚ وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَحْكُمُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ فِيمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ﴿١٢٤﴾

शनिवार के दिन का सम्मान करना तो केवल उन्हीं यहूदियों पर फ़र्ज़ किया गया था, जिन्होंने उसके बारे में मतभेद किया था। ताकि वे उस दिन अपने सारे कार्यों को छोड़कर इबादत में व्यस्त रहें, जबकि वे जुमे के दिन से भटक गए थे, जिसमें उन्हें सारे कार्य छोड़ इबादत का आदेश दिया गया था। और (ऐ रसूल!) निश्चय ही आपका पालनहार इन मतभेद करने वालों के बीच क़ियामत के दिन उस विषय में निर्णय कर देगा, जिसमें वे मतभेद किया करते थे, फिर हर एक को वह बदला देगा, जिसका वह हक़दार होगा।