तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَمَا كَانَ ٱلنَّاسُ إِلَّآ أُمَّةً وَٰحِدَةً فَٱخْتَلَفُوا۟ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِىَ بَيْنَهُمْ فِيمَا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ﴿١٩﴾
सारे मनुष्य केवल एक ही एकेश्वरवादी मोमिन समुदाय थे। फिर उन्होंने विभेद किया। अतः उनमें से कुछ लोग विश्वासी (मोमिन) बने रहे और कुछ ने कुफ़्र (अविश्वास) किया। यदि अल्लाह की तरफ से पहले ही यह निर्णय न किया जा चुका होता कि वह लोगों के बीच होने वाले मतभेद के बारे में इस दुनिया में फैसला नहीं करेगा, बल्कि उनके बीच उसके बारे में क़ियामत के दिन फ़ैसला करेगा। यदि यह बात न होती, तो इस संसार ही में उनके बीच उसका फ़ैसला कर दिया जाता, जिसमें वे विभेद कर रहे हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता कि कौन सीधे रास्ते पर चलने वाला है और कौन भटका हुआ है।