तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُمْ وَلَا يَنفَعُهُمْ وَيَقُولُونَ هَـٰٓؤُلَآءِ شُفَعَـٰٓؤُنَا عِندَ ٱللَّهِ ۚ قُلْ أَتُنَبِّـُٔونَ ٱللَّهَ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَلَا فِى ٱلْأَرْضِ ۚ سُبْحَـٰنَهُۥ وَتَعَـٰلَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ ﴿١٨﴾
मुश्रिक (बहुदेववादी) लोग अल्लाह के सिवा कथित देवताओं की पूजा करते हैं, जो न लाभ पहुँचाते हैं और न हानि। जबकि सत्य पूज्य तो जब चाहे लाभ और हानि पहुँचा सकता है। तथा वे लोग अपने देवताओं के बारे में कहते हैं : ये मध्यस्थ हैं, जो अल्लाह के यहाँ हमारे लिए सिफारिश करेंगे। अतः वह हमारे पापों के कारण हमें यातना नहीं देगा। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : क्या तुम लोग सब कुछ जानने वाले अल्लाह को सूचना दे रहे हो कि उसका कोई साझी है, हालाँकि वह आकाशों में और धरती में अपना कोई साझी नहीं जानता! मुश्रिक (बहुदेववादी) लोग जो कुछ असत्य एवं झूठ कह रहे हैं, अल्लाह उससे पाक और पवित्र है।