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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 578

75:20 कदापि नहीं[8], बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।

75:21 और बाद में आने वाली (आख़िरत) को छोड़ देते हो।

75:22 उस दिन कई चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।

75:23 अपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।

75:24 और कई चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।

75:25 उन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।

75:26 कदापि नहीं[9], जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।

75:27 और कहा जाएगा : कौन है झाड़-फूँक करने वाला?

75:28 और उसे विश्वास हो जाएगा कि यह (संसार से) जुदाई का समय है।

75:29 और पिंडली, पिंडली[10] के साथ लिपट जाएगी।

75:30 उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर जाना है।

75:31 तो न उसने (सत्य को) माना और न नमाज़ पढ़ी।

75:32 लेकिन उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।

75:33 फिर अकड़ता हुआ अपने परिजनों की ओर गया।

75:34 तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।

75:35 फिर तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।

75:36 क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?[11]

75:37 क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?

75:38 फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।

75:39 फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।

75:40 क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?

76:1 निश्चय इनसान पर ज़माने का एक ऐसा समय भी गुज़रा है, जब वह कोई ऐसी चीज़ नहीं था जिसका (कहीं) उल्लेख[1] हुआ हो।

76:2 निःसंदेह हमने इनसान को मिश्रित वीर्य[2] से पैदा किया, हम उसकी परीक्षा लेते हैं। तो हमने उसे सुनने वाला, देखने वाला बना दिया।

76:3 निःसंदेह हमने उसे रास्ता दिखा दिया।[3] (अब) वह चाहे कृतज्ञ बने और चाहे कृतघ्न।

76:4 निःसंदेह हमने काफ़िरों के लिए ज़ंजीरें तथा तौक़ और भड़कती हुई आग तैयार की है।

76:5 निश्चय सदाचारी लोग ऐसे जाम से पिएँगे, जिसमें कपूर का मिश्रण होगा।