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القدر

आयत 4

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

تَنَزَّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ ﴿٤﴾

उस रात में फ़रिश्ते और जिबरील अलैहिस्सलाम अपने महिमावान् पालनहार की अनुमति से हर उस चीज़ के साथ उतरते हैं, जिसका आल्लाह उस वर्ष में फैसला किया होता है, चाहे उसका संबंध रोज़ी से हो, या मृत्यु, या जन्म या इनके अलावा किसी अन्य से हो, जिनका अल्लाह फैसला करता है।