तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَّقَد تَّابَ ٱللَّهُ عَلَى ٱلنَّبِىِّ وَٱلْمُهَـٰجِرِينَ وَٱلْأَنصَارِ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُ فِى سَاعَةِ ٱلْعُسْرَةِ مِنۢ بَعْدِ مَا كَادَ يَزِيغُ قُلُوبُ فَرِيقٍ مِّنْهُمْ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّهُۥ بِهِمْ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ ﴿١١٧﴾
अल्लाह ने पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को माफ़ कर दिया, जो आपने मुनाफ़िक़ों को तबूक के युद्ध से पीछे रहने की अनुमति प्रदान कर दी थी। तथा मुहाजिरों और अंसार को भी माफ़ कर दिया, जो उससे पीछे नहीं रहे, बल्कि भीषण गरमी, माली परेशानी और शक्तिशाली दुश्मन का सामना होने के बावजूद तबूक के युद्ध में आपके साथ निकल पड़े। जबकि उनमें से एक समूह के दिल विपरीत परिस्थितियों के कारण बहकने लगे थे, जो युद्ध छोड़ने का इरादा कर चुके थे। फिर अल्लाह ने उन्हें दृढ़ रहने और लड़ाई के लिए निकलने की तौफ़ीक़ प्रदान की और उनकी तौबा क़बूल कर ली। निःसंदेह अल्लाह उनपर कृपा करने वाला और दयावान् है और यह उसकी दया ही है कि उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी और उनकी तौबा क़बूल कर ली।