तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَا يَزَالُ بُنْيَـٰنُهُمُ ٱلَّذِى بَنَوْا۟ رِيبَةً فِى قُلُوبِهِمْ إِلَّآ أَن تَقَطَّعَ قُلُوبُهُمْ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ﴿١١٠﴾
उनकी यह मस्जिद, जिसे उन्होंने (मुसलमानों को) नुक़सान पहुँचाने के लिए बनाया है, सदा उनके दिलों में संदेह और निफ़ाक़ के रूप में बसी रहेगी, यहाँ तक कि मौत से अथवा तलवार के द्वारा वध से उनके दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ। अल्लाह अपने बंदों के कामों को जानने वाला, उनके अच्छे या बुरे कर्म का बदला देने में हिकमत वाला है।