तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَمِمَّنْ حَوْلَكُم مِّنَ ٱلْأَعْرَابِ مُنَـٰفِقُونَ ۖ وَمِنْ أَهْلِ ٱلْمَدِينَةِ ۖ مَرَدُوا۟ عَلَى ٱلنِّفَاقِ لَا تَعْلَمُهُمْ ۖ نَحْنُ نَعْلَمُهُمْ ۚ سَنُعَذِّبُهُم مَّرَّتَيْنِ ثُمَّ يُرَدُّونَ إِلَىٰ عَذَابٍ عَظِيمٍ ﴿١٠١﴾
देहात के वासियों में से जो लोग मदीना के आस-पास हैं, उनमें से कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं और मदीना वालों में से भी कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं, जो निफाक़ पर क़ायम और उसपर जमे हुए हैं। (ऐ रसूल!) आप उन्हें नहीं जानते, अल्लाह ही उन्हें भली-भाँति जानता है। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें दो बार यातना देगा : एक बार दुनिया में उनके पाखंड को उजागर करके तथा उन्हें क़त्ल किए जाने और बंदी बनाए जाने के द्वारा, तथा दूसरी बार आख़िरत में क़ब्र की यातना देकर। फिर वे क़ियामत के दिन जहन्नम के पाताल में एक बड़ी यातना की ओर लौटाए जाएँगे।