तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَا يَرْقُبُونَ فِى مُؤْمِنٍ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً ۚ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُعْتَدُونَ ﴿١٠﴾
वे अपनी शत्रुता के कारण किसी मोमिन के बारे में अल्लाह का, या किसी रिश्तेदारी, या किसी प्रतिज्ञा का सम्मान नहीं करते हैं। वे अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं; क्योंकि वे अन्याय और आक्रामकता की विशेषता रखते हैं।