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الفجر

आयत 15

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَأَمَّا ٱلْإِنسَـٰنُ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكْرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَكْرَمَنِ ﴿١٥﴾

जहाँ तक इनसान का मामला है, तो उसका स्वभाव यह है कि यदि उसका पालनहार उसका परीक्षण करे और उसे सम्मानित करे, तथा उसे धन, संतान और प्रतिष्ठा प्रदान करे, तो वह सोचता है कि यह उसे अल्लाह के निकट सम्मान प्राप्त होने के कारण है। चुनाँचे वह कहता है : मेरे पालनहार ने मुझे सम्मानित किया, क्योंकि मैं उसके सम्मान के योग्य था।