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الانفطار

आयत 6

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ ﴿٦﴾

ऐ अपने रब का इनकार करने वाले इनसान! आख़िर किस बात ने तुझे अपने रब के आदेश का उल्लंघन करने पर उभारा, जब उसने तुझे मोहलत दी और अपने अनुग्रह से तुझे दंडित करने में जल्दी नहीं की?!