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الأنفال

आयत 53

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ لَمْ يَكُ مُغَيِّرًا نِّعْمَةً أَنْعَمَهَا عَلَىٰ قَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا۟ مَا بِأَنفُسِهِمْ ۙ وَأَنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ﴿٥٣﴾

यह दर्दनाक यातना इस कारण है कि अल्लाह जब किसी जाति को कोई अनुग्रह प्रदान करता है, तो उसे उनसे उस समय तक नहीं छीनता, जब तक कि वे ईमान, धार्मिकता और नेमतों के प्रति आभार की अपनी अच्छी स्थिति को बदलकर अल्लाह के इनकार, उसकी अवज्ञा और उसकी नेमतों की नाशुक्री की बुरी स्थिति को न अपना लें। और यह कि अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है। उनकी कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है।