तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا ﴿٢٤﴾
वे उसमें न ठंडी हवा का स्वाद ले सकेंगे, जो उनसे दोज़ख़ की गर्मी को शांत कर सके, और न ही वे उसमें कोई आनंददायक पेय चखेंगे।
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا ﴿٢٤﴾