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القيامة

आयत 36

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَن يُتْرَكَ سُدًى ﴿٣٦﴾

क्या इनसान यह समझता है कि अल्लाह उसे शरीयत का बाध्य किए बिना यूँ ही बेकार छोड़ देगा?!