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نوح

आयत 4

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ ﴿٤﴾

अगर तुम ऐसा करोगे, तो अल्लाह तुम्हारे उन गुनाहों को क्षमा कर देगा, जो बंदों के अधिकारों से संबंधित नहीं हैं। और तुम्हारे समुदाय की जीवन-अवधि एक निर्धारित समय तक बढ़ा देगा, जो अल्लाह के ज्ञान में है। जब तक तुम इसपर क़ायम रहोगे, धरती को आबाद रखोगे। निश्चय जब मौत आ जाती है, तो टाली नहीं जाती। अगर तुम इस तथ्य को जानते होते, तो अल्लाह पर ईमान लाने और अपने शिर्क और गुमराही से तौबा करने में अवश्य जल्दी करते।