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المعارج
आयत 15
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
كَلَّآ ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ ﴿١٥﴾
मामला वैसा नहीं है, जैसा कि इस अपराधी ने कामना की है। निश्चय वह आख़िरत की आग है, जो भड़क रही है और लपट मार रही है।
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