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الأعراف

आयत 93

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَـٰقَوْمِ لَقَدْ أَبْلَغْتُكُمْ رِسَـٰلَـٰتِ رَبِّى وَنَصَحْتُ لَكُمْ ۖ فَكَيْفَ ءَاسَىٰ عَلَىٰ قَوْمٍ كَـٰفِرِينَ ﴿٩٣﴾

जब उनका विनाश हो गया, तो उनके पैगंबर शुऐब अलैहिस्सलाम उनसे विमुख हो गए और उन्हें संबोधित करते हुए बोले : ऐ मेरी जाति के लोगो! मैंने तुम्हें वह संदेश पहुँचा दिया था जिसका मेरे पालनहार ने मुझे तुमको पहुँचाने का आदेश दिया था, तथा मैं तुम्हारा हितैषी व शुभ चिंतक बना रहा, किंतु तुमने मेरी ख़ैर-ख़्वाही (शुभचिंतन) को स्वीकार नहीं किया और मेरे मार्गदर्शन पर चलने को तैयार न हुए। तो भला मैं ऐसे लोगों पर शोक कैसे करूँ, जो अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वाले हैं और अपने कुफ़्र पर अडिग हैं?