तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَإِذَا فَعَلُوا۟ فَـٰحِشَةً قَالُوا۟ وَجَدْنَا عَلَيْهَآ ءَابَآءَنَا وَٱللَّهُ أَمَرَنَا بِهَا ۗ قُلْ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَأْمُرُ بِٱلْفَحْشَآءِ ۖ أَتَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ ﴿٢٨﴾
और जब मुश्रिक लोग कोई अति घृणित काम करते हैं, जैसे शिर्क तथा निर्वस्त्र होकर काबा का तवाफ़ करना आदि, तो वे यह बहाना पेश करते हैं कि उन्होंने अपने बाप-दादा को ऐसा करते पाया है और यह कि अल्लाह ने उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया है। (ऐ मुहम्मद!) आप उनके जवाब में कह दें : अल्लाह गुनाहों का आदेश नहीं देता, बल्कि वह उनसे मना करता है। तो फिर तुम अल्लाह पर कैसे इसका दावा करते हो? क्या (ऐ मुश्रिको!) तुम झूठ बोलते हुए और झूठा आरोप लगाते हुए अल्लाह के बारे में ऐसी बात कहते हो, जो तुम नहीं जानते?!