तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَمَّا سُقِطَ فِىٓ أَيْدِيهِمْ وَرَأَوْا۟ أَنَّهُمْ قَدْ ضَلُّوا۟ قَالُوا۟ لَئِن لَّمْ يَرْحَمْنَا رَبُّنَا وَيَغْفِرْ لَنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلْخَـٰسِرِينَ ﴿١٤٩﴾
और जब वे (अपने किए पर) लज्जित और चकित हुए तथा समझ गए कि वे अल्लाह के साथ बछड़े को पूज्य बनाने के कारण सही मार्ग से भटक गए हैं, तो अल्लाह से विनयपूर्वक प्रार्थना करते हुए कहने लगे : यदि हमारे पालनहार ने अपने आज्ञापालन की तौफ़ीक़ देकर हमपर दया नहीं की, और हमने बछड़े की पूजा करके जो पाप किया है, उसे क्षमा नहीं किया, तो हम निश्चित रूप से उन लोगों में से हो जाएँगे जिन्होंने अपनी दुनिया और आख़िरत दोनों का घाटा किया।