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القلم

आयत 1

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ نٓ ۚ وَٱلْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُونَ ﴿١﴾

{नून} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। अल्लाह ने क़लम की क़सम खाई है तथा उस चीज़ की क़सम खाई है, जो लोग अपनी क़लमों से लिखते हैं।