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التحريم

आयत 11

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًا لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱمْرَأَتَ فِرْعَوْنَ إِذْ قَالَتْ رَبِّ ٱبْنِ لِى عِندَكَ بَيْتًا فِى ٱلْجَنَّةِ وَنَجِّنِى مِن فِرْعَوْنَ وَعَمَلِهِۦ وَنَجِّنِى مِنَ ٱلْقَوْمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿١١﴾

और अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, यह बतलाने के लिए कि काफ़िरों के साथ उनका संबंध उन्हें कुछ नुक़सान नहीं पहुँचाएगा और उन्हें प्रभावित नहीं करेगा जब तक कि वे सत्य पर सुदृढ़ हैं, फ़िरऔन की पत्नी की स्थिति का उदाहरण प्रस्तुत किया है, जब उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए अपने निकट जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन के अत्याचार और उसके बुरे कामों से बचा ले तथा मुझे उन लोगों से बचा ले, जो उसकी सरकशी एवं अत्याचार में उसका पालन करके अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।