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الأنعام

आयत 57

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قُلْ إِنِّى عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّى وَكَذَّبْتُم بِهِۦ ۚ مَا عِندِى مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِۦٓ ۚ إِنِ ٱلْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۖ يَقُصُّ ٱلْحَقَّ ۖ وَهُوَ خَيْرُ ٱلْفَـٰصِلِينَ ﴿٥٧﴾

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मैं अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर क़ायम हूँ, न कि मन की इच्छा पर। और तुमने इस प्रमाण को झुठला दिया है। मेरे पास वह यातना नहीं है, जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो और न ही चमत्कारी निशानियाँ जो तुमने माँगी हैं। बल्कि वह केवल अल्लाह के हाथ में है। क्योंकि निर्णय करना (जिसमें वह भी शामिल है जिसकी तुमने माँग की है) केवल अल्लाह का अधिकार है। वह सत्य कहता है और उसके द्वारा फैसला करता है। और वह महिमावान सबसे अच्छा है, जिसने सत्यवादियों और असत्यवादियों को खोलकर बयान किया और उनके बीच अंतर स्पष्ट किया।