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الواقعة

आयत 47

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَكَانُوا۟ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ﴿٤٧﴾

और वे मरने के बाद पुनः जीवित किए जाने का इनकार करते थे। चुनाँचे उसका मज़ाक उड़ाते हुए और उसे असंभव समझते हुए कहते थे : क्या जब हम मर जाएँगे तथा मिट्टी और सड़ी हुई हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या हम उसके बाद फिर से जीवित करके उठाए जाएँगे?!