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الواقعة

आयत 45

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ ﴿٤٥﴾

वे इस यातना तक पहुँचने से पहले, दुनिया की सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे, उन्हें अपनी इच्छाओं की पूर्ति के सिवा किसी चीज़ की परवाह नहीं थी।