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الواقعة
आयत 30
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَظِلٍّ مَّمْدُودٍ ﴿٣٠﴾
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई, निरंतर रहने वाली है, जो कभी समाप्त न होगी।
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