×
النجم
आयत 38
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ ﴿٣٨﴾
कि कोई इनसान किसी अन्य व्यक्ति के पाप को वहन नहीं करेगा।
पिछली आयत
अगली आयत