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الطور

आयत 45

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَـٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى فِيهِ يُصْعَقُونَ ﴿٤٥﴾

अतः (ऐ रसूल!) आप उन्हें उनके हठ और इनकार में छोड़ दें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन से जा मिलें, जिसमें उन्हें यातना दी जाएगी और वह क़ियामत का दिन है।