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الطور

आयत 4

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَٱلْبَيْتِ ٱلْمَعْمُورِ ﴿٤﴾

और उस घर की क़सम खाई है, जिसे फ़रिश्ते आकाश में अल्लाह की इबादत से आबाद रखते हैं।