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आयत 11

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

رِّزْقًا لِّلْعِبَادِ ۖ وَأَحْيَيْنَا بِهِۦ بَلْدَةً مَّيْتًا ۚ كَذَٰلِكَ ٱلْخُرُوجُ ﴿١١﴾

हमने इसमें से जो कुछ उगाया, उसे बंदों की रोज़ी के लिए उगाया, जिससे वे खाते हैं। और इसके साथ हमने एक ऐसे शहर को पुनर्जीवित कर दिया जिसमें कोई वनस्पति नहीं है। जिस तरह हमने इस बारिश से एक वनस्पति रहित शहर को पुनर्जीवित किया, उसी तरह हम मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित करेंगे। चुनाँचे वे जीवित होकर बाहर निकलेंगे।