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المائدة

आयत 83

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَإِذَا سَمِعُوا۟ مَآ أُنزِلَ إِلَى ٱلرَّسُولِ تَرَىٰٓ أَعْيُنَهُمْ تَفِيضُ مِنَ ٱلدَّمْعِ مِمَّا عَرَفُوا۟ مِنَ ٱلْحَقِّ ۖ يَقُولُونَ رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱكْتُبْنَا مَعَ ٱلشَّـٰهِدِينَ ﴿٨٣﴾

और इन लोगों (जैसे नजाशी और उनके साथियों) के दिल बड़े नरम हैं। यही कारण है कि क़ुरआन का पाठ सुनने के समय जब उन्हें पता चलता है कि वह सत्य है, तो विनम्रता से रोते हैं; क्योंकि वे उसे पहचानते हैं जो ईसा अलैहिस्सलाम लेकर आए थे। वे कहते हैं : ऐ हमारे रब! हम उसपर ईमान लाए, जो तूने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा है। अतः (ऐ हमारे रब!) हमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत के साथ लिख ले, जो क़ियामत के दिन लोगों के ख़िलाफ हुज्जत (गवाही देने वाले) होंगे।