तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَّخِذُوا۟ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُوا۟ دِينَكُمْ هُزُوًا وَلَعِبًا مِّنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ مِن قَبْلِكُمْ وَٱلْكُفَّارَ أَوْلِيَآءَ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ﴿٥٧﴾
ऐ ईमान वालो! उन यहूदियों और ईसाइयों को जो तुमसे पहले किताब दिए गए तथा मुश्रिकों को सहयोगी और दिली दोस्त न बनाओ, जो तुम्हारे धर्म का मज़ाक उड़ाते हैं और उसके साथ खिलवाड़ करते हैं। तथा अल्लाह से उस चीज़ से बचकर डरो, जो उसने तुम्हें उनकी दोस्ती से मना किया है, यदि तुम अल्लाह पर तथा उसपर ईमान रखने वाले हो, जो उसने तुमपर उतारा है।