तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَٱلسَّارِقُ وَٱلسَّارِقَةُ فَٱقْطَعُوٓا۟ أَيْدِيَهُمَا جَزَآءًۢ بِمَا كَسَبَا نَكَـٰلًا مِّنَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ ﴿٣٨﴾
जो चोरी करने वाला (पुरुष) और जो चोरी करने वाली (स्त्री) है (ऐ शासको!) उनमें से प्रत्येक के दाहिने हाथ को काट दो, यह उनके लिए अल्लाह की ओर से उसके बदले एवं दंड के रूप में है जो उन दोनों ने अवैध रूप से लोगों का माल लिया है, तथा उन्हें और दूसरों को डराने के लिए है। तथा अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी (सभी चीज़ों की) पूर्वनियति (तक़दीर) और अपने विधान में हिकमत वाला है।