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المائدة

आयत 100

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قُل لَّا يَسْتَوِى ٱلْخَبِيثُ وَٱلطَّيِّبُ وَلَوْ أَعْجَبَكَ كَثْرَةُ ٱلْخَبِيثِ ۚ فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ يَـٰٓأُو۟لِى ٱلْأَلْبَـٰبِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ﴿١٠٠﴾

(ऐ रसूल!) आप कह दें कि कोई भी अपवित्र (बुरी) चीज़ किसी भी पवित्र (अच्छी) चीज़ के बराबर नहीं है, यद्यपि अपवित्र (बुरी) चीज़ की बहुतायत आपको भली लगे। क्योंकि उसकी बहुतायत उसकी श्रेष्ठता का संकेत नहीं देती है। अतः (ऐ बुद्धि वालो!) अपवित्र को छोड़कर और पवित्र को करके अल्लाह से डरो, ताकि तुम्हें जन्नत प्राप्त हो।