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محمد

आयत 16

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُ إِلَيْكَ حَتَّىٰٓ إِذَا خَرَجُوا۟ مِنْ عِندِكَ قَالُوا۟ لِلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْعِلْمَ مَاذَا قَالَ ءَانِفًا ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ طَبَعَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَهْوَآءَهُمْ ﴿١٦﴾

और मुनाफ़िक़ों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो (ऐ रसूल!) आपकी ओर कान लगाते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य स्वीकार करना नहीं, बल्कि मुँह फेरना होता है। यहाँ तक कि जब आपके पास से निकलते हैं, तो अनजान बनते हुए और उपेक्षा करते हुए उन लोगों से कहते हैं, जिन्हें अल्लाह ने ज्ञान दिया है : उन्होंने अभी-अभी अपनी बात में क्या कहा? यही वे लोग हैं, जिनके दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है, इसलिए कोई अच्छाई उन तक नहीं पहुँचती, तथा उन्होंने अपनी इच्छाओं का पालन किया है, जिनके कारण वे सच्चाई से अंधे कर दिए गए हैं।