तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَهُمْ يَقْسِمُونَ رَحْمَتَ رَبِّكَ ۚ نَحْنُ قَسَمْنَا بَيْنَهُم مَّعِيشَتَهُمْ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۚ وَرَفَعْنَا بَعْضَهُمْ فَوْقَ بَعْضٍ دَرَجَـٰتٍ لِّيَتَّخِذَ بَعْضُهُم بَعْضًا سُخْرِيًّا ۗ وَرَحْمَتُ رَبِّكَ خَيْرٌ مِّمَّا يَجْمَعُونَ ﴿٣٢﴾
(ऐ रसूल!) क्या आपके पालनहार की दया को ये लोग बाँटते हैं कि जिसे चाहते हैं देते हैं और जिसे चाहते हैं नहीं देते हैं या अल्लाह बाँटता है? हमने ही दुनिया में उनके बीच उनकी रोज़ी को बाँटा है और उनमें से किसी को धनवान् और किसी को निर्धन बनाया है; ताकि उनमें से कुछ लोग कुछ के अधीन हो जाएँ। और आख़िरत में आपके पालनहार की अपने बंदों के प्रति दया, उससे बेहतर है, जिसे ये लोग इस नश्वर दुनिया के सामान से इकट्ठा कर रहे हैं।